योग साधना आश्रम
में रोगी को भर्ती करके प्राकृतिक व यौगिक चिकित्सा पद्धति से
उपचार किया जाता है. रोगी कम से कम १० दिन ज्यादा से ज्यादा तीन
माह तक भर्ती के बाद रखा जाता है. रोगियों के लिए सामान्य वार्ड,
विशेष वार्ड, कॉटेज वार्ड की व्यवस्था है जिनमें दो-दो रोगियों
के निवास के प्रबंध के साथ उनकी चिकित्सा की भी उत्तम व्यवस्था
है महिला एवं पुरुषों के लिए पृथक-पृथक उपचार कक्ष एवं जनरल
वार्ड है. विभाग में अनुभवी चिकित्सकों व सेवाभावी उपचारकों
द्वारा चिकित्सा की जाती है. कुछ वातानुकूलित भी हैं.
बाह्य विभाग :
पंजीयन शुल्क के
बाद आश्रम रोगों को निःशुल्क काउंसलिंग भी करता है. बाह्य विभाग
में जो रोगी आते है उन्हें एक दिन पूर्व आकर मिलना पड़ता है, रोगी
के रोग के अनुसार अभ्यास कराकर घर भेज दिया जाता है. प्राकृतिक व
फिजियोंथेरेपी की चिकित्सा भी उसी दिन दी जाती है जिसके लिए रोगी
को नाम मात्र का शुल्क देना होता है.
मानसिक शान्ति और अध्यात्मिक उन्नति के लिए आश्रम में प्रत्येक सोमवार
को नियमित रूप से यज्ञ व ध्यान होता है. यज्ञ से वायुमंडल की शुद्धि
होती है. ध्यान से आत्मा की शुद्धि होती है. फलस्वरूप सहज शान्ति की
प्राप्ति होती है. कुछ रोगों के उप्छार में यज्ञ मंत्रों का भी
अत्यधिक महत्त्व होता है.
प्रयोगशाला
आश्रम
में विविध उपकरणों से सुसज्जित जाच प्रयोगशाला है. उसमें अन्तः विभाग
में बरती रोगियों की आवश्यकतानुसार सभी प्रकार की जाच की जाती है. जाच
के परिणाम पुरे वैज्ञानिक आधार पर निकालें जाते है. पूज्य स्वामीजी
योग को विज्ञान के साथ जोड़कर चलना चाहते थे.
संस्था को दिए गए दान/चंदे
पर आयकर अधिनियम की धारा ८०-जी के तहत छुट है