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प्राकृतिक चिकित्सा
उपचार की केवल एक वैज्ञानिक विधि ही नहीं अपितु स्वस्थ जीवन जीने
की एक कला भी है. प्राकृतिक चिकित्सा के आधारभूत सिद्धांत
पंचमहाभूतों के भारतीय दर्शन के अत्यंत अनुकूल हैं. प्राकृतिक
चिकित्सा में प्रयोग की जाने वाली प्रमुख उपचार विधियां मिट्टी,
पानी, सूर्य की किरणे, हवा, मालिश, प्राकृतिक आहार, उपवास और
व्यायाम आदि है. हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका में ये तत्व
प्रतिबिंबित होते हैं और इन्ही तत्वों की सहायता से की गयी चिकित्सा
प्राकृतिक चिकित्सा कहलाती
है. |
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प्राकृतिक चिकित्सा स्वस्थ जीवन जीने की कला है. योग साधना आश्रम
निम्नलिखित उपचार विधियों से रोगियों को राहत पहचानें का कार्य करता
है : |
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भाप स्नान
(Steam Bath)
यह मोटापा,
संधिशोथ, दम, गठिया, साइटिका, तंत्रिकाशोथ, बिना खुले घावों
वाले चर्म रोगों तथा सामान्य शिथिलीकरण के लिए उपयोगी है. |
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मिट्टी स्नान
(Mud Therapy)
यह चर्म रोगों
जैसे एक्जिमा, सोराइसिस तथा उलझन, तनाव, सिरदर्द, अनिद्रा,
उच्चरक्तचाप, मधुमेह, माइग्रेन, मानसिक रोगों, पाचन सम्बन्धी
विकारों आदि में उपयोगी है. |
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लेखिका :
डॉ पुष्पलता परमहंस
(प्रेसिडेंट
- योग साधना आश्रम) |
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सूर्य स्नान
(Sun Bath)
यह गठिया,
संधिवात, मोटापा, सोराइसिस, दाद, कुपोषण तथा अपच, रिकेट्स, दम
आदि में उपयोगी है. |
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मालिश (Masso
Therapy)
यह माश्पेशियों
एवं शरीर के सभी संस्थानों को क्रियाशील बनाती है. उच्च या
निम्नाराक्ताचाप, जोडों के विकार, लकवा, अवसाद, दर्द की
स्थानीय या सामान्य अवस्थाएं, दुर्बलता, अपच और मोटापा में
उपयोगी है. |
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अन्य थेरेपियाँ
जैसे - फिसियोथेरेपी, हाईड्रो थेरेपी, स्पिरिचुअल थेरेपी,
केरेला मसाज भी यहा उपलब्ध है. |
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प्राकृतिक चिकित्सा की फोटो
गेलेरी देखें
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योगासन के अध्यन
एवं अभ्यास द्वारा शारीरिक,
मानसिक,
नैतिक एवं
अध्यात्मिक विकास
होता है |
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